जंगल का लोकतंत्र और चापलूस मंत्री | Jangal Ka Loktantr Aur Chaplus Mantri
शरद ऋतु का आरंभ था। जंगल में चुनावों का दौर चल रहा था। प्रधान पद के लिए कई जानवरों ने अपनी-अपनी दावेदारी पेश की। लेकिन जब शक्तिशाली मितल शेर ने चुनाव लड़ने की घोषणा की,
तो बाकी दावेदार पीछे हट गए। निर्धारित समय पर चुनाव हुए और मितल शेर भारी मतों से जीतकर जंगल का प्रधान बन गया।
चापलूस मंत्रियों का उदय
शेर के प्रधान बनते ही चार गीदड़ उसके चारों ओर घूमने लगे। वे उसकी निरंतर प्रशंसा करने लगे और दूसरों की चुगली करके शेर तक पहुँचाते रहे। धीरे-धीरे शेर उनकी बातों में इतना फँस गया कि
जंगल की जिम्मेदारियाँ भी उन्हीं को सौंप दीं। शेर गुफा में आराम करता और मंत्री अपने स्वार्थ के काम निकालते – भ्रष्टाचार करना, चुगली करना, डर दिखाना और प्राणियों का शोषण करना।
जनता की पीड़ा और शेर का घमंड जंगल के प्राणी दुखी होकर शिकायत करने जाते, परंतु शेर उनकी बात सुनने के बजाय उन्हें ही दंडित कर देता। मंत्री भी शिकायत करने वालों को प्रताड़ित करते,
ताकि कोई और आवाज न उठा सके। धीरे-धीरे चुनाव का समय फिर आ गया। मितल शेर को घमंड था कि उसने इतने “काम” किए हैं कि कोई उसके खिलाफ खड़ा ही नहीं होगा। वह सोचने लगा कि बिना मेहनत किए ही जीत जाएगा।लेकिन प्रचार-प्रसार के दौरान उसे पता चला कि उसके प्रिय गीदड़ मंत्रियों ने किसी और उम्मीदवार का समर्थन कर दिया है।अब शेर को होश आया और वह चुनाव मैदान में उतरा, परंतु बहुत देर हो चुकी थी।
परिणाम
मितल शेर को करारी हार का सामना करना पड़ा। क्रोधित होकर वह अपने मंत्रियों पर चिल्लाने लगा।
मंत्रियों ने उत्तर दिया –
“हमने तो आपको बार-बार समझाया था कि गुफा में बैठे रहने से सत्ता नहीं चलती। जनता के बीच जाना और काम करना जरूरी है।” तब शेर को अपनी गलती का एहसास हुआ और उसने कहा- “हे दुष्ट मंत्रियों! तुम सत्ता के लोभी हो, किसी प्राणी के हितैषी नहीं।” परंतु अब पछताने से कोई लाभ न था।
शिक्षा –
- नेता वही सफल होता है जो जनता की सेवा करे।
- अहंकार, चापलूसी और अन्याय पर टिके हुए सिंहासन अधिक दिन तक नहीं टिकते।
- शक्ति से राज मिल सकता है, परंतु उसे बनाए रखने के लिए विश्वास और न्याय आवश्यक है।
- यदि शासक जनता की पीड़ा से मुँह मोड़ ले, तो समय आने पर जनता भी उससे मुँह मोड़ लेती है।
- चापलूसों की संगति हमेशा विनाश की ओर ले जाती है
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Sar aapki kahaniyan itni dilchasp Hain ki Dil ki gehraiyon Ko chhu jaati hai. Aap vakya mein Hindi sahitya ke kalakar hai.
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Thank you sonu ji
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बहुत बढ़िया भाई जी। डटे रहिए
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