बच्चे किसके अच्छे हैं | Bachche kiske achhe hain?
बच्चे किसके अच्छे हैं?
गरीब के बच्चे तब तक अच्छे,
जब तक दूसरों के गुलाम हैं।
अमीर के बच्चे तब तक अच्छे,
जब तक बाप के पास धन-दौलत और नाम हैं।
गरीब का बच्चा मेहनत करे तो “मजदूर” कहलाता है,
अमीर का बेटा आराम करे तो “शानदार” कहलाता है।
एक भूख से लड़ता है, दूजा फैशन से,
पर दोनों ही हालातों के कैदी हैं इस समाज के।
गरीब की औलाद सलीके से बोले तो “अकड़” लगती है,
अमीर की औलाद बदतमीज़ हो तो “स्टाइल” लगती है।
कौन समझाए इस दुनिया को —
कदर इंसान की नहीं, जेब की होती है यहाँ!
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