अनजान | Anjaan | Kushal Sharma

                  अनजान | Anjaan | Kushal Sharma

 

इस वीरान ज़िंदगी में
कोई अनजान सा शख़्स आता है,
जो दोस्त भी नहीं, हमसफ़र भी नहीं,
फिर भी दिल के बहुत करीब आ जाता है।
ढेरों बातें होती हैं उससे,
हज़ारों दुख-सुख भी बंटते हैं,
जो बातें किसी से नहीं कहते,
वो भी उससे कहते हैं।
वह तो अनजान सा था,
पर अपनों से भी बढ़कर था।
कोई रिश्ता नहीं है उससे,
फिर भी उसकी हर बात
मानने को दिल करता है।
कोई हक़ नहीं है उस पर हमारा,
फिर भी उस पर
हक़ जताने को दिल करता है।
जब रूठ जाए दिल,
तो उसके ख़्वाबों में रहने को जी चाहता है।
अनजान होकर भी वो
पल-पल का इम्तिहान करवाता है,
छूट न जाए वो ख़्वाब कहीं,
एक-जान होने का एहसास दिलाता है।
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