माँ | Maa
माँ, तेरे चरणों में आया हूँ,
पर जननी को अनाथालय छोड़ आया हूँ।
तेरी भक्ति में रहता हूँ लीन,
अपनी कर्तव्य-जननी से हो गया पराधीन।
तेरे लिए तो कहलाता हूँ सपूत,
घर पहुँचते ही बन जाता हूँ कपूत।
माँ, यही है आज के युग की कहानी,
सबको सद्बुद्धि दे हे जगत-भवानी।
करना इस संसार का कल्याण,
हर जननी पाए घर-घर सम्मान।

Maa