यहाँ सब बिकता है | Yahaan sab bikta hai | Poem by Kushal Sharma

यहाँ सब बिकता है Yahaan sab bikta hai Poem by Kushal Sharma kushal ki kalam

यहाँ सब बिकता है | Yahaan sab bikta hai

 

यहाँ सब बिकता है

बड़ी ताज्जुब की बात है

इंसान को इंसान के हाथों बिकते देखा,

कोई किसी का ईमान बेचकर खुश है,

कोई किसी का ईमान खरीदकर खुश है।

बाबू, ये दुनिया है –

यहाँ सब कुछ बिकता है,

तन भी बिकता है, मन भी बिकता है

पैसों के आगे कुछ भी नहीं टिकता है।

बस, माली अच्छा होना चाहिए,

तभी तो बन्द कमरे में भी

फूल खिलता है।

 

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