यहाँ सब बिकता है | Yahaan sab bikta hai
यहाँ सब बिकता है
बड़ी ताज्जुब की बात है
इंसान को इंसान के हाथों बिकते देखा,
कोई किसी का ईमान बेचकर खुश है,
कोई किसी का ईमान खरीदकर खुश है।
बाबू, ये दुनिया है –
यहाँ सब कुछ बिकता है,
तन भी बिकता है, मन भी बिकता है
पैसों के आगे कुछ भी नहीं टिकता है।
बस, माली अच्छा होना चाहिए,
तभी तो बन्द कमरे में भी
फूल खिलता है।
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Good
Bhut acha likha h apne