सौन्दर्य श्रृंगार | Saundarya Shringaar | kushal sharma

सौन्दर्य श्रृंगार Saundarya Shringaar By Kushal Sharma

सौन्दर्य श्रृंगार |Saundarya Shringaar

कौन कहता है कि शराब खराब होती है।

ये तो पुरूषों के सौंदर्य का श्रृंगार होती है।

आंखें लाल और चाल बेमिसाल होती है।

बस पीने की एक दरकार होती है।

छुपी कला को बाहर करने की बहार होती है।

डरे हुए की हौंसले की पहचान होती है।

इसे पीकर अपने तो क्या परायों से भी बकवास होती है।

फिर कहते ये पुरूषों के सौंदर्य की श्रृंगार होती है।

इससे कई उजड़े फिर भी यह महानता की सरकार होती है।

अन्न -धन से बढ़कर यह आतिथ्य सत्कार होती है।

आजकल के युवाओं की यह खासमखास रोजगार होती है।

दुकानदारों की इस कारोबार से ही शुरूआत होती है।

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