शायरी | Shayari | कुशल शर्मा

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एक दिन चाँद ने चाँदनी से कहा,
“मेरी वजह से ही तेरी शान है।”
चाँदनी मुस्कुराई और बोली—
“नहीं चाँद… ये तो बस तेरा ख़ाली अभिमान है,
मेरी तो आसमां के सितारों से भी पहचान है।
हाँ, ये तेरा मान है कि तुझसे मेरी शान है,
वरना मेरा तो असमान के सितारों में अपना ही मुकाम है।”

  ऐ वक्त तू इतना बदल जाए कि हर घड़ी एक पल हो जाए,
दुनिया ने जो दिए हैं दर्द, बस उसी में दिल का हल हो जाए।

 

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