मार्च महीना | March Mahina | Kushal Sharma

मार्च महीना | March Mahina | Kushal Sharma

  1. मार्च महीना किसी को खुशी,
    किसी को ग़म लाया।
    शुरू होते ही
    अपने साथ पेपर लाया।
    भूख, प्यास, नींद को
    मिटाने आया।
    कुछ होंगे पास,
    कुछ होंगे फेल —
    यही मार्च का वास्तविक खेल।
    जिन्होंने रखी थी
    नकल की आस,
    उड़नदस्ता
    न होने देगा पास।
    पेपर देखकर
    हर कोई घबराया,
    किसी ने सिर पकड़ा, कोई रोता पाया।
    अब जिनके हाल-बेहाल हैं,
    वो “कल-कल” करते
    काट गए पूरा साल ।
    समय ने उनको यही समझाया
    मेहनत के बिना न कोई फल पाया।
    मेहनत ही सच्चा साथ निभाए,
    मार्च हर साल
    यही सिखाए।

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