भ्रष्टाचार | Bhrshtachar | Kushal Sharma

       भ्रष्टाचार | Bhrshtachar | Kushal Sharma

दुनिया के कोने -कोने से काली घटा घेरने को आया ।

भाई -भतीजावाद को लेकर बेईमानों में छाया ।

जाल माया का बुनकर मायावी बनने को आया ।

ये असाध्य रोग बनकर सब विभागों में हरषाया 

   सच्च को झूठ बताकर समाज में पुण्य कमाया। 

जटिल से जटिल कामों का ये सरल मार्ग कहलाया।

इंसान का प्रिय बनकर गरीबों का हक इसने खाया।

मीठा बोलकर सबको अपनी चाल में फसाया।

भ्रष्टाचार करते करते इसने अपने आप को नहीं समझाया।

सब तंत्रों में इसने अपनी माया का जाल फैलाया।

अनहोनी को होनी कर बेमानी का परचम फहराया।

 गरीबों से नाता तोड़ कर अमीरों का नाती कहलाया।

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