रविवार की छुट्टी का इतिहास व बदलाव | Bharat mein Ravivaar ki Chhutti ka Itihaas aur Usmein Hue Badlaav
रविवार की छुट्टी आज हमें सामान्य लगती है, लेकिन इसे पाने के पीछे एक लंबा संघर्ष और ऐतिहासिक आंदोलन रहा है। आइए इसे सरल शब्दों में समझते हैं।
️ अंग्रेजों के शासन से पहले का समय
भारत में प्राचीन काल से ही धार्मिक या क्षेत्रीय त्योहारों पर ही अवकाश की परंपरा थी।
उस समय साप्ताहिक छुट्टी का कोई निश्चित नियम नहीं था।
किसान, मजदूर और व्यापारी अपने काम के अनुसार आराम के दिन स्वयं तय करते थे।
ब्रिटिश शासन के दौरान (19वीं सदी)
जब अंग्रेज़ भारत आए, तो उन्होंने कारखानों और दफ्तरों में सातों दिन काम करने की व्यवस्था लागू की।मजदूरों को हफ्ते में कोई छुट्टी नहीं मिलती थी, जिससे उनमें थकान और असंतोष बढ़ने लगा।
रविवार की छुट्टी के लिए संघर्ष (1880 के दशक में)
लाहौर के रेलवे वर्कशॉप में काम करने वाले एक भारतीय कर्मचारी नारायण मेघाजी लोकहांडे ने इस अन्याय के खिलाफ आवाज उठाई।उन्होंने 1881 में ब्रिटिश सरकार से रविवार को साप्ताहिक अवकाश घोषित करने की मांग की।लोकहांडे को भारत का पहला मजदूर नेता (Labour Leader) भी कहा जाता है।
परिणाम – 1889 में रविवार की छुट्टी की स्वीकृति
लगातार संघर्ष और याचिकाओं के बाद, ब्रिटिश सरकार ने 1889 में रविवार को सरकारी और फैक्ट्री कर्मचारियों के लिए साप्ताहिक अवकाश घोषित किया।यह नियम पहले रेलवे और डाक विभाग में लागू हुआ, फिर धीरे-धीरे पूरे भारत में फैल गया।
रविवार क्यों चुना गया?
ब्रिटिश ईसाई समुदाय रविवार को “Lord’s Day” (भगवान का दिन) या आराधना का दिन मानता था।इसी कारण उन्होंने रविवार को अवकाश का दिन चुना। भारत में भी यह परंपरा जारी रही।
आज की स्थिति
आज रविवार को राष्ट्रीय स्तर पर साप्ताहिक अवकाश माना जाता है।सरकारी दफ्तर, स्कूल, बैंक और अधिकांश निजी संस्थान इस दिन बंद रहते हैं।
हालाँकि कुछ सेवाएँ — जैसे अस्पताल, परिवहन और मीडिया — निरंतर चलती रहती हैं।
18वीं और 19वीं सदी में सरकारी कर्मचारियों की संख्या बहुत कम थी, इसलिए सभी को एक ही दिन छुट्टी देना आसानथा।लेकिन आज सरकारी कामों की मात्रा और विभागों की संख्या काफी बढ़ चुकी है।यदि सरकार भिन्न-भिन्न विभागों में अलग-अलग दिन अवकाश घोषित करे, तो इससे दो बड़े फायदे होंगे —
- सरकारी कामकाज निरंतर चलता रहेगा।
- कर्मचारी अपने निजी कार्यों के लिए उचित समय निकाल पाएंगे।
क्योंकि आज अधिकतर कर्मचारियों का कार्य समय सुबह 9 से शाम 5 बजे तक का होता है, जिससे उन्हें व्यक्तिगत कामों के लिए समय नहीं मिल पाता।
ऐसे में अलग-अलग विभागों में अलग-अलग छुट्टी का प्रावधान एक सकारात्मक सुधार हो सकता है।
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