ऑपरेशन सिंदूर | Operation Sindoor | कुशल शर्मा

ऑपरेशन सिंदूर Operation Sindoor  Poem Shayri Kushal sharma

ऑपरेशन सिंदूर | Operation Sindoor

उर सी निशानी लिए खड़ा  है –ऑपरेशन सिंदूर
अरे !  तू बिल में क्यूँ दुबक रहा है,ए आतंकिस्तान,
माँ की ममता को उजाड़ कर,कहाँ भाग रहा है अब तू दूर?
अब मैं आ गया हूँ , काल बनकर,
तुझे कर दूँगा चकनाचूर।
ये भारत का वादा है,
अब तू बता, तेरा क्या इरादा है?
तू आतंक की राह को  छोड़ दे,
या अपने प्राणों से नाता तोड़ दे।
तूने बहुतों के घर उजाड़े हैं, ए आतंकिस्तान,
अब तेरी कब्र खोदने के लिए आया है हिंदोस्तान।
नाम  है —ऑपरेशन सिंदूर,
अब तू बच नहीं सकता, चाहे भाग से कोसों दूर।
मौत खड़ी है  तेरे दरवाजे पे
नाम लिए –ऑपरेशन सिंदूर।
उर सी निशानी लिए खड़ा  है –ऑपरेशन सिंदूर
अरे !  तू बिल में क्यूँ दुबक रहा है,ए आतंकिस्तान,
माँ की ममता को उजाड़ कर,कहाँ भाग रहा है अब तू दूर?
अब मैं आ गया हूँ , काल बनकर,
तुझे कर दूँगा चकनाचूर।
ये भारत का वादा है,
अब तू बता, तेरा क्या इरादा है?
तू आतंक की राह को  छोड़ दे,
या अपने प्राणों से नाता तोड़ दे।
तूने बहुतों के घर उजाड़े हैं, ए आतंकिस्तान,
अब तेरी कब्र खोदने के लिए आया है हिंदोस्तान।
नाम  है — ऑपरेशन सिंदूर,
अब तू बच नहीं सकता, चाहे भाग से कोसों दूर।
मौत खड़ी है  तेरे दरवाजे पे
नाम लिए –ऑपरेशन सिंदूर।
यह भी पढ़ें: ऐ दर्द | Ae Dard | Kushal Sharma
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