इंसान | Insaan
धर्म और धन के बीच में खड़ा है इंसान,
जाए कहाँ – इसी सोच में पड़ा है इंसान।
बस एक उलझन में पड़ा है इंसान
धर्म और धन में किसे बताए महान?
जिसे न समझ,न ज्ञान
उसके लिए धन है महान।
जो सत्य की राह पर करे काम,
उसके लिए धर्म है भगवान।
जो इन दोनों में अंतर ढूंढ न पाए,
वह करता मूर्खों की सरदारता का सम्मान।
धन से बने धनवान,
धर्म से मिले भगवान
फिर भी तू अंतर जान न पाया इंसान।
ईश्वर कैसी है तेरी माया,
न मिला धन न रही काया।
अधूरी रह गई मेरे अरमानों की छाया
बस सपनों में रह गया जीने का साया।
